मैं तुम्हारी याद में तिल-तिल जलूँगी
तुम सितारा बन गए हो मैं धरा की धूल हूँ
हो गए तुम पार प्रियतम मैं अभी इस कूल हूँ
मिलन का क्षण जोहती साँसे गिनूंगी
अब न बांधूंगी तुम्हें तुम मुक्त विचरो
स्वर्ग से पाताल तक चाहे जहाँ ठहरो
रुख इधर करना कभी
तो राह तकती मैं मिलूंगी
ज़िन्दगी है एक सपने की कहानी
पलक पर ठहरा हुआ दो बूँद पानी
सँग तुम्हारे मृत्यु में
कल्पान्त तक विचरण करूंगी
रुख इधर करना कभी
तो राह तकती मैं मिलूंगी
ज़िन्दगी है एक सपने की कहानी
पलक पर ठहरा हुआ दो बूँद पानी
सँग तुम्हारे मृत्यु में
कल्पान्त तक विचरण करूंगी
चाँदनी निष्प्रभ कभी इतनी न थी
रात वीरानी घनी इतनी न थी
कर गए सबको अकिंचन
मैं भला क्यों दोष दूँगी
चाहतों के अनगिनत पल
आंसुओं में हैं बरसते
प्रीति के उच्छ्वास निशि-दिन
साँस में हैं आह भरते
अब न जीवनधन तुम्हें
इसके सिवा कुच्छ और दूँगी
मैं तुम्हारी याद में तिल-तिल जलूँगी
प्रीति के उच्छ्वास निशि-दिन
साँस में हैं आह भरते
अब न जीवनधन तुम्हें
इसके सिवा कुच्छ और दूँगी
मैं तुम्हारी याद में तिल-तिल जलूँगी
3 comments:
मैं तुम्हारी याद में तिल-तिल जलूँगी
bahut hi achcha.
आपने बहुत अच्छा िलखा है । मैने अपने ब्लाग पर- सुरक्षा ही नहीं होगी तो कैसे नौकरी करेंगी मिहलाएं - िलखा है । इस मुद्दे पर आप अपनी प्रितिक्र्या देकर बहस को आगे बढा सकते हैं-
http://www.ashokvichar.blogspot.com
Bahut achhi tarah se samvedanaon ko abhivyakt kiya hai aapne. meri anubhuti ko maine bhi http://atmhanta.blogspot.com par shabd pradan kiya hai, kripya padharen.
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